ईंट से ईंट जोड़ कर बनती हैं दीवारें आदमी और आदमी के बीच उगती हैं दीवारें लोग दीवारों को अकेला पा कर उनसे करते हैं संवाद कुछ आवारा नौजवान लिख देते हैं उस पर अपनी प्रेमिका का नाम कुछ लोग उकेरते हैं अपनी वेदना या देते हैं कोई पैगाम दीवार विचार की हो या आचार की खडी हो रही हैं रातों रात अपनों के बीच कुछ लोग बनाते हैं दीवारें कुछ लोग ढहाते हैं दीवारें कुछ लोग सजाते हैं दीवारें कातिलों के डर से बनी एक दीवार देख कर विश्व के लोग आज तक आश्चर्यचकित हैं कुछ दीवारें से किसी को कोई आश्चर्य नहीं जब सभ्यता सहमती है तो बनती है दीवार जब सभ्यता समझती है तो ढहती है दीवार आओ यह दीवार ढहा दें इसकी ईंट से ईंट बजा दें ईंट सभ्यता का पहला औजार होती है ईंट क्रांति का आख़िरी हथियार होती हैं."-------- राजीव चतुर्वेदी
"मत
भूलो ईंट क्रांति का आख़िरी हथियार होती है ....यह लोकतंत्र ...यह समाज
आत्मकेंद्रित स्वार्थी लोगों की बदौलत नहीं ज़िंदा है ....यह लोकतंत्र ज़िंदा
लोगों , ज़िंदा कौमों की बदौलत ज़िंदा है ... याद रहे ज़िंदा कौमें पाँच साल
तक इन्तजार नहीं करतीं . " ---- राजीव चतुर्वेदी
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