Wednesday, February 29, 2012

शायद कविता उसको भी कहते हैं



"मेरी बहने कुछ उलटे कुछ सीधे शब्दों से
कविता बुनना नहीं जानती
वह बुनती हैं हर सर्दी के पहले स्नेह का स्वेटर
खून के रिश्ते और वह ऊन का स्वेटर
कुछ उलटे फंदे से कुछ सीधे फंदे से
शब्द के धंधे से दूर स्नेह के संकेत समझो तो
जानते हो तो बताना बरना चुप रहना और गुनगुनाना
प्रणय की आश से उपजी आहटों को मत कहो कविता
बुना जाता तो स्वेटर है, गुनी जाती ही कविता है
कुछ उलटे कुछ सीधे शब्दों से कविता जो बुनते हैं
वह कविताए दिखती है उधड़ी उधड़ी सी
कविता शब्दों का जाल नहीं
कविता दिल का आलाप नहीं
कविता को करुणा का क्रन्दन मत कह देना
कविता को शब्दों का अनुबंधन भी मत कहना
कविता शब्दों में ढला अक्श है आह्ट का
कविता चिंगारी सी, अंगारों का आगाज़ किया करती है
कविता सरिता में दीप बहाते गीतों सी
कविता कोलाहल में शांत पड़े संगीतों सी
कविता हाँफते शब्दों की कुछ साँसें हैं
कविता बूढ़े सपनो की शेष बची कुछ आशें  हैं
कविता सहमी सी बहन खड़ी दालानों में
कविता  बहकी सी तरूणाई
कविता चहकी सी चिड़िया, महकी सी एक कली  
पर रुक जाओ अब गला बैठता जाता है यह गा-गा कर
संकेतों को शब्दों में गढ़ने वालो
अंगारों के फूल सवालों की सूली
जब पूछेगी तुमसे--- शब्दों को बुनने को कविता क्यों कहते हो ?
तुम सोचोगे चुप हो जाओगे
इस बसंत में जंगल को भी चिंता है
नागफनी में फूल खिले हैं शब्दों से
शायद कविता उसको भी कहते हैं." -----राजीव चतुर्वेदी 

5 comments:

aarya said...

बहुत सुन्दर ! वास्तव में कविता इसे ही कहते हैं |

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 26/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सटीक विश्लेषण कविता का ... सुंदर प्रस्तुति

Avirat Prerna said...

जी ....हाँ ..कविता इसको ही कहते हैं ....!! अत्यंत ह्रदय - स्पर्शी भाव - उर्मियाँ .....!!! राजीव जी ! इस अनुपम लेखन के लिए अनंत शुभ कामनाएं .....!!!

Anonymous said...

जी हाँ ...... इसको ही कविता कहते हैं ...!!! अद्भुत और अनुपम भाव - उर्मियाँ देखने को ...अनुभूत करने को प्राप्त हुईं ....! शेयर के लिए हार्दिक आभार ....और अनंत शुभ कामनाएं ... राजीव जी !