Saturday, November 10, 2012

धन्य त्रियोदसी



"!! धन्यवाद ज्ञापन ही "धन्य त्रियोदसी" यानी कि धनतेरस का उद्देश्य है. आज के दिन ही एक लम्बे निर्वासन के बाद भगवान् राम जो नैतिकता / मर्यादा के प्रतीक माने जाते हैं अपने स्थान पर वापस आये थे. इसे प्रतीकात्मक रूप से बोला जाए तो today after a long exile virtues ( नैतिकता / मर्यादा ) returned home. This story relates to Ram's exile and his return to Ayodhya. इस धन्यभाव के  "धन्य" का अपभ्रंश हो कर "धन" होगया . अब धन प्रधान समाज में धनतेरस है. सरकारी दफ्तरों मैं , अदालत के पेशकारों मैं , सत्ता के दलालों मैं , साहूकारों की गद्दी पर धनतेरस है और असली भारत धन को तरस रहा है उसकी "धन तरस" है . !!---- धन्य त्रियोदसी की शुभ और मंगल कामना।" --- राजीव चतुर्वेदी



3 comments:

वन्दना said...

बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

मन के सुन्दर दीप जलाओ******प्रेम रस मे भीग भीग जाओ******हर चेहरे पर नूर खिलाओ******किसी की मासूमियत बचाओ******प्रेम की इक अलख जगाओ******बस यूँ सब दीवाली मनाओ

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर विश्लेषण..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
त्यौहारों की शृंखला में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धनपूजा और भाईदूज का हार्दिक शुभकामनाएँ!