Sunday, November 4, 2012

जब मौत मेरी हमसफ़र हो तो डरूं किस से यहाँ ?

"जिन्दगी के कई सफ़र में मौत मेरी घात में थी,
जब मौत मेरी हमसफ़र हो तो डरूं किससे यहाँ ?"
                 --- राजीव चतुर्वेदी

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

जब अन्त नियत तो वर्षों से क्या विवाद।

Anita said...

और क्या ! बिल्कुल सही...!
कब, किस पल...आमना-सामना हो जाए..क्या पता !
~सादर !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

मौत तो अवश्यम्भावी है!