Saturday, August 30, 2014

बियाबान में अब अकेले ही कुछ गाया जाए

"रात बाकी हो, दहशत जवाँ हो, दिये बुझ गए हों ,
जिन्दा रहने के हौसलों को फिर से जगाया जाए .
राह में सूखे हुए रिश्तों को अब तापें कब तक
सर्द रातों में बुझे प्यार को जलाया जाए
बेहद खूबसूरत है तन्हाई का अंदाज़ -ए -बयाँ यह भी ,
कि
बियाबान में अब अकेले ही कुछ गाया जाए ." ----- राजीव चतुर्वेदी

1 comment:

Vijay Jayara said...

बहुत सुन्दर बयाँ किया