Saturday, July 19, 2014

बलात्कार की घटनाओं की आड़ में लिंग युद्ध को बढ़ावा न दें



"स्त्री और पुरुष के बीच परस्पर प्राकृतिक आकर्षण के सम्बन्ध रहे हैं . आदिम युग में आकर्षण नहीं एक पक्षीय अतिक्रमण होता था ...देवता सुन्दर कन्याओं को देख कर और कुछ नहीं बस पुत्रवती होने का आशीर्वाद ही देते थे...वर्जन मेरी क्वारी माँ थीं तो मोहम्मद की महिलाओं के प्रति हरकतें ठीक नहीं थीं . ...सभ्यता का क्रमशः विकास हुआ ...धार्मिक कानूनों की जगह सभी समाज की आकांक्षाओं के अनुरूप समतावादी क़ानून आये ....स्त्री पुरुष के उपभोग की चीज यानी "भोग्या" नहीं रही ...अब स्त्री पुरुष के परस्पर आकर्षणजन्य दैहिक सम्बन्धों को "उपभोग " या "विषय भोग " नहीं "सम्भोग" कहा जाने लगा यानी "भोग की समता" ...यानी राग इधर भी हो उधर भी ...आग इधर भी हो उधर भी . इसके लिए जरूरी थे स्त्री -पुरुष के सामंजस्यपूर्ण रिश्ते ...आकर्षण पैदा करने के नैतिक और भौतिक अवसर .---- क्या हैं ? आज स्त्री और पुरुष परस्पर आकर्षण के अवसरों की तलाश में नहीं एक द्वंद्व में शामिल हैं .... देश के कथित बुद्धिजीवियों ने , व्यथित महिला आंदोलनों ने और पतित पत्रकारों ने स्त्री -पुरुष सामंजस्य और स्वाभाविक आकर्षण की जगह "लिंग युद्ध " यानी Gender War शुरू कर दी . ...स्त्री -पुरुष के बीच परस्पर आकर्षण का वातावरण असंतुलित होने लगा ...."सम्भोग " के लिए आवश्यक स्त्री -पुरुष "समता " जाती रही आदिम युग का स्त्री "उपभोग" चालू हुआ ...स्त्री -पुरुष के बीच लिंग युद्ध यानी gender war की शुरूआत हो चुकी थी ...परस्पर आकर्षण की जगह परस्पर आक्रामकता आ चुकी थी ...समाज में प्रणय निवेदन की जगह प्रणय अतिक्रमण होने लगे " ...आ मेरी गाडी में बैठ जा ..." हन्नी सिंह और टेम्पू -टेक्सी में चीखते भोजपुरी गाने प्रणय निवेदन की जगह प्रणय अतिक्रमण का प्रचार कर रहे थे ...वातावरण बन चुका था ...लिंग युद्ध यानी gender war की रणभेरी गली-गली पूरी गलाजत से गूँज रही थी ...परस्पर आकर्षण और 'सम्भोग' के समीकरण बदल चुके थे अब फिरसे अतिक्रमण और 'उपभोग' की शुरूआत थी . ---- हर बलात्कार की घटना इसका शुरूआती सामाजिक संकेत है . याद रहे पुलिस की भूमिका बलात्कार के बाद शुरू होती है और समाज की भूमिका बलात्कार के पहले, बहुत पहले शुरू हो जाती है . पुलिस को कोसने के पहले हम समाज को क्यों नहीं कोसते ? हम बलात्कार की इन घटनाओं की आड़ में लिंग युद्ध को बढ़ावा न दें ...लिंग युद्ध यानी gender war के कारण ही पुरुष अतिक्रमण बढ़ रहा है जिसका संकेत हैं बलात्कार की बढ़ती वीभत्स घटनाएं ...हमको स्त्री -पुरुष के बीच परस्पर आकर्षण के अवसर और वातावरण को बढ़ाना होगा ताकि प्रणय अतिक्रमण नहीं प्रणय आग्रह हो ." ------ राजीव चतुर्वेदी

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"हमको स्त्री -पुरुष के बीच परस्पर आकर्षण के अवसर और वातावरण को बढ़ाना होगा ताकि प्रणय अतिक्रमण नहीं प्रणय आग्रह हो".
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आपने बिल्कुल सही फरमाया है।