Monday, May 11, 2015

कहानी एक थी किरदार जुदा थे अपने

"कहानी एक थी किरदार जुदा थे अपने
स्वार्थ में बँट चुके खुदगर्ज खुदा थे अपने
खुद को रिश्तों और फरिश्तों में हमने बाँट लिया
हर्फ़ तो एक पर ज़र्फ़ जुदा थे अपने
यह इत्तफाक था कि हम एक ही रास्ते के राहगीर हुए

यह हकीकत थी कि सराय एक थी स्वभाव जुदा थे अपने
प्यार रिश्तों में अहम था पर वहम ही निकला
मुहब्बत की इबारत में तिजारत झाँकती थी
अंदाज़ एक सा पर अहसास जुदा थे अपने
जब जरूरत पड़ी तो जज्वात भी हमने बाँट लिए
जरिया और नजरिया जुदा होता तो चल भी जाता
समंदर एक था साहिल ही जुदा थे अपने
तू भी एक रोज कश्ती सी कहीं डूब गयी
मैं भी लहूलुहान सूरज सा समंदर में हर शाम डूबता ही रहा
कहानी एक अंजाम जुदा थे अपने ."

------- राजीव चतुर्वेदी

2 comments: