Monday, January 12, 2015

...और अब वही कौम आतंकवाद के लिए जानी जाती है


"उन्होंने इत्र ईजाद कर मानवता को कभी महकाया था ... उन्होंने अद्भुद और बेमिशाल खूबसूरत स्थापत्य भी किये ... उन्होंने न्याय को व्यवस्था भी दी और शब्दावली भी जो आज तक हमारी अदालतों में गूंजती है ...उन्होंने महान साहित्य और अद्भुद संगीत दिया ... निश्चय ही एक काल खण्ड में उनसे सभ्यता महकी और चहकी ...फिर उन्होंने शराब दी ...जी हाँ "अल कोहल" अंगरेजी नहीं अरबी का शब्द है । फिर सभयता महकी, चहकी और बहकी ...। अचानक एक मोड़ आया और वह कौम जो औरत को पर्दानशीन मानती थी उसने कुछ औरतों को बाज़ार नें बेजार किया ...पतन शुरू हो चुका था । और अब वही कौम विध्वंश, धमाके, निर्दोषों के क़त्ल, औरतों के अपहरण और उन्हें बाजार में सरे आम बेचने के लिए, आतंकवाद के लिए, जुल्म और जरायम के लिए जानी जाती है । आज विश्व सभ्यता को कभी बहुत कुछ देने वाला इस्लाम और वह मुसलमान कौम विश्व सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा है । ...आज दहशतगर्दी की मुखर या मौन हिमायत करती कौम वक्त के आईने में अपना बदलता चेहरा देखे । आईना तोड़ने से कोई बन्दर सिकंदर नहीं हो जाता ।" ---- राजीव चतुर्वेदी




 

1 comment:

Vijay Jayara said...

विडंबना !!!